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वाराणसी: प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर रोक लगाने के पुलिस ने खूब दावे किए। कई थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर बरामदगी की और अपनी पीठ खुद ठोंकी। निगरानी के लिए ड्रोन उड़ाने का दावा किया लेकिन कोई इंतजाम काम न आया।
मकर संक्रांति से एक दिन पहले बुधवार को प्रतिबंधित मांझे ने कई राहगीरों के नाक-कान और गला-पलकें तक काटे। खून से तर-बतर राहगीरों को कई टांके लगे और इलाज कराया गया।
लोहता थाना क्षेत्र के चुरामनपुर के रहने वाले जितेंद्र मौर्य बाइक से रामनगर जा रहे थे। सामनेघाट पुल पर चढ़ते समय ही प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आ गए। वह जब तक संभलते उनकी दोनों पलक व नाक को धारदार मांझा ने रेत दिया और वह लहूलुहान हो गए। आसपास के लोग उन्हें लेकर रामनगर चिकित्सालय पहुंचे और प्राथमिक उपचार कराया।
वहीं कंदवा की कृति गिरी दुर्गाकुंड से गुजर रही थीं। इसी दौरान प्रतिबंधित मांझा से चपेट में आने से चेहरा जख्मी हो गया। पुलिस ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के बाद स्वजन को सौंपा। चिरईगांव प्रतिनिधि के अनुसार स्वर्वेद महामंदिर उमरहां से दर्शन कर लौट रहे चंदौली के जिगना चकिया निवासी संतोष कुमार (32 वर्ष) वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर खानपुर के सामने प्रतिबंधित मांझा की चपेट में आ गए।
बाइक जब तक रोकते मांझे ने उनकी नाक रेत दी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार के बाद चिकित्सकों ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

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