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सुविख्यात कथक नर्तक पण्डित बिरजू महाराज को ताल की थापों और घुँघुरूओं की रूनझुन को महारास के माधुर्य में तब्दील करने में महारत हासिल थी. उनकी नृत्य में पदचालन की सूक्ष्मता और मुख व गर्दन के चालन की विशिष्टता लोगों को सम्मोहित करती है.
पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि 🙏

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