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रायपुरकलां स्थित गोशाला में 50 से अधिक गोवंश की मौत ने न सिर्फ प्रशासन, बल्कि समाज के सामने भी एक गंभीर चेतावनी खड़ी कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गायें लंबे समय से प्लास्टिक और कचरा खा रही थीं, जिससे उनका पाचन तंत्र बुरी तरह खराब हो चुका था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, गायों के पेट में पॉलिथीन और कचरा मिला है। लगातार जहरीला और अपचनीय कचरा खाने से उनकी सांस की नली गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी, जिसके कारण दम घुटने से मौत हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि जब गायों का पाचन कमजोर हो जाता है, तो फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर भी सीधा असर पड़ता है।
जांच के लिए सैंपल सीएफएसएल लैब भेजे गए हैं, ताकि यह साफ हो सके कि कहीं किसी जहरीले पदार्थ का सेवन तो नहीं कराया गया। इसके साथ ही बढ़ती ठंड को भी गायों की मौत का एक सहायक कारण माना जा रहा है।
यह घटना सिर्फ एक गोशाला की लापरवाही नहीं, बल्कि खुले में फैले प्लास्टिक कचरे और कमजोर निगरानी व्यवस्था की भयावह तस्वीर है। अगर समय रहते कचरा प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जा सकती हैं।
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