भारत की आखिरी सती: रूप कंवर राजपूत और 1987 का वो इतिहास 🙏
आज इतिहास के पन्नों से उस घटना को याद करते हैं जिसने न केवल राजस्थान बल्कि पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। बात है 1987 की, जब राजस्थान के सीकर जिले के दिवराला गाँव में रूप कंवर राजपूत जी सती हुई थीं।
महज 18 साल की उम्र और शादी के सिर्फ़ 7 महीने बाद, जब उनके पति माल सिंह शेखावत का निधन हुआ, तो रूप कंवर जी ने वो फैसला लिया जो सदियों से राजपूती परंपरा का हिस्सा रहा है। उस समय राजपूत समाज में पुनर्विवाह की रीत नहीं थी और पति के साथ जीने-मरने का वचन ही सर्वोपरि माना जाता था। इसी वचन को निभाते हुए उन्होंने अपने पति की चिता के साथ सती होने का मार्ग चुना।
यह घटना 'भारत की आखिरी सती' घटना मानी जाती है। इसके बाद जयपुर की सड़कों पर हजारों राजपूत अपनी परंपरा के सम्मान में तलवारें लेकर उतर आए थे। इस घटना की गूंज इतनी तेज थी कि BBC जैसे अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इसे कवर किया।
इसके बाद देश के कानून में बड़े बदलाव हुए और सती प्रथा के खिलाफ सख्त कानून बने। उस समय 39 लोगों पर मुकदमे चले, जिनमें से कई बरी भी हो चुके हैं। आज भी दिवराला गाँव में सती माता रूप कंवर जी का स्थान मौजूद है, जो उस त्याग और इतिहास का गवाह है।