4 ore - Tradurre

"इतिहास के पन्नों में दबी एक सच्चाई! 🚩
8वीं सदी में जब अरब आक्रमणकारी भारत की ओर बढ़ रहे थे, तब मेवाड़ के बप्पा रावल ने उन्हें न केवल हराया, बल्कि खदेड़ते हुए ईरान और अफगानिस्तान तक ले गए।
सामरिक दृष्टि से उन्होंने जिस जगह अपनी मुख्य सैन्य चौकी बनाई, उसे 'रावल की पिंडी' (रावल का गाँव/छावनी) कहा जाने लगा।
समय के साथ यह नाम बिगड़कर 'रावलपिंडी' हो गया।
यह शहर आज भी हमारे पूर्वजों के शौर्य की गवाही देता है।

image