हापुड़ ज़िले के प्रेमचंद सैनी की कहानी छोटे कस्बों की असली हकीकत दिखाती है। पढ़ाई के बाद नौकरी के सीमित मौके थे, इसलिए मेडिकल स्टोर पर काम शुरू किया। कम तनख्वाह थी, लेकिन यहीं से उन्होंने दवाइयों का कारोबार समझा।
बी फार्मा किया, उधार और बचत से अपनी दुकान खोली। शुरुआती दिनों में साइकिल से दवाइयां पहुंचाईं। ग्राहक कम थे, मुश्किलें ज़्यादा।
मार्च 2025 में यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिले लोन ने स्टॉक मजबूत किया और काम को स्थिरता दी। आज उनका मेडिकल स्टोर आसपास के लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरत पूरी करता है।