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सूनसान सड़क, अंधेरी रात और नशे की हालत में लड़खड़ाती एक युवती—यह मंजर किसी भी बड़ी अनहोनी (Mishap) का संकेत दे सकता था, लेकिन एक अजनबी युवक की 'इंसानियत' ने आज एक बेटी की आबरू और जान दोनों बचा ली। यह घटना उस वक्त की है जब शहर की व्यस्त सड़कें खामोश हो चुकी थीं और लोग पास से गुजरने के बावजूद इस स्थिति को Ignore कर आगे बढ़ रहे थे।
तभी वहां से गुजर रहे एक युवक ने युवती को Critical Condition में देखा। बिना किसी संकोच या सवाल के, उसने युवती को Physical Support दिया और उसका Address पता करने की कोशिश की। कड़ी मशक्कत के बाद जब लोकेशन ट्रैक हुई, तो युवक ने उसे सुरक्षित उसके घर तक पहुँचाया। दरवाजा खुलते ही सामने खड़े लाचार माता-पिता के होश उड़ गए। युवक ने पूरी घटना की जानकारी दी और बिना किसी Recognition या इनाम की चाहत के वहां से चुपचाप चला गया। अपनी बेटी को सुरक्षित देख पिता की आंखों में आंसू और चेहरे पर गहरी शर्मिंदगी थी, क्योंकि एक अजनबी ने उस वक्त जिम्मेदारी निभाई जब समाज की संवेदनहीनता (Insensitivity) चरम पर थी।
सोशल मीडिया पर इस घटना के वायरल होने के बाद अब एक गंभीर बहस (Serious Debate) छिड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि "क्या हमारी बेटियां आज के समाज में सुरक्षित हैं? और क्या भरोसा अब सिर्फ चंद अजनबियों तक ही सीमित रह गया है?" ऐसे दौर में जहां Crime Rate और स्वार्थ बढ़ता जा रहा है, वहां इस युवक का निस्वार्थ कदम (Selfless Act) एक बड़ी मिसाल पेश करता है। यह मामला साफ संदेश देता है कि समाज का चरित्र आज भी उन चंद लोगों की वजह से बचा हुआ है जो मुश्किल वक्त में 'Humanity' को सर्वोपरि रखते हैं। See less

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