मेरठ की रहने वाली संजू वर्मा ने समाज की उस सोच को चुनौती दी, जहाँ लड़कियों के सपनों से पहले उनकी शादी तय कर दी जाती है।
मां के निधन के बाद जब परिवार ने जल्दी शादी का दबाव बनाया, तो संजू ने 2013 में घर छोड़ने का कठिन फैसला लिया।
बहुत कम पैसों के साथ दिल्ली आकर उन्होंने एक छोटे से कमरे में रहकर नई ज़िंदगी शुरू की और अपने सपनों को ज़िंदा रखा।
आने वाले 7 साल संघर्ष से भरे रहे—दिन में पार्ट-टाइम पढ़ाना, बच्चों को ट्यूशन देना और रात में खुद की पढ़ाई।
आर्थिक तंगी और अकेलेपन के बावजूद संजू ने हार नहीं मानी।
आखिरकार 2020 में उन्होंने UPPSC परीक्षा पास कर PCS अधिकारी बनकर वापसी की।
उनकी कहानी बताती है कि हिम्मत, मेहनत और आत्मविश्वास हो तो हालात कितने भी मुश्किल हों, सफलता ज़रूर मिलती है।