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गणतंत्र दिवस 26 जनवरी आने वाला है और राष्ट्रपति भवन ने इस बार कुछ ऐसा किया है, जिसने सबका दिल जीत लिया। मेहमानों को जो आमंत्रण पत्र भेजा गया है, वो कोई साधारण कार्ड नहीं है। यह समर्पित है हमारे पूर्वोत्तर भारत के 'अष्टलक्ष्मी' राज्यों के कारीगरों को!
इस कार्ड का हर कोना, हर डिजाइन उन कारीगरों की कहानी कहता है जिन्होंने पीढ़ियों से अपनी विरासत को जिंदा रखा है।
✅ बांस की कारीगरी।
✅ पारंपरिक बुनाई (Weaving)।
✅ सदियों पुरानी सांस्कृतिक चित्रकारी।
राष्ट्रपति भवन ने यह संदेश दिया है कि भारत की असली खूबसूरती उसकी 'विविधता' में है। यह उन हजारों गुमनाम शिल्पकारों का सम्मान है, जिनके हाथों में जादू है लेकिन जिन्हें अक्सर वो पहचान नहीं मिलती जिसके वो हकदार हैं।
जब दुनिया के मेहमान इस कार्ड को हाथ में लेंगे, तो वो सिर्फ एक कागज नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता और संस्कृति को महसूस करेंगे। पूर्वोत्तर की इस विरासत को मुख्यधारा में लाने के लिए एक सलाम तो बनता है!

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