किसी ने माँगा नहीं था, फिर भी केंद्र की भाजपा सरकार ने UGC के माध्यम से एक ऐसा नियम थोप दिया है, जो हर कॉलेज और विश्वविद्यालय के परिसर में सामान्य वर्ग के छात्रों को खुलेआम निशाना बनाने का रास्ता खोल रहा है। रोहित वेमुला जैसे मामलों पर बवाल मचाने वाली सरकार ने अब 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026' नाम से एक नया बिल लागू कर दिया है।

इस नए व्यवस्था के अनुसार, हर उच्च शिक्षा संस्थान में 'इक्विटी कमिटी' और 'इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर' बनाना अनिवार्य है। इन कमिटियों में SC, ST, OBC, महिलाओं और विकलांगों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों-शिक्षकों का कोई स्थान नहीं। ये कमिटी 'समानता स्क्वाड' की तरह काम करेगी, जो कैंपस में घूम-फिरकर शिकायतें इकट्ठा करेगी। एक भी शिकायत मिली नहीं कि सामान्य वर्ग के छात्र को तुरंत दोषी ठहरा दिया जाएगा। जांच का पूरा बोझ उसी पर डाल दिया जाएगा।

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