देश में 100 से ज़्यादा सवर्ण सांसद बैठे हैं,
फिर भी UGC जैसा कानून बिना विरोध के आ गया।
इसका मतलब साफ़ है— मुद्दा संख्या का नहीं, नीयत का है, इन नेताओं की प्राथमिकता समाज नहीं, सत्ता है।
चुनाव के समय सवर्ण याद आते हैं, लेकिन नीति बनाते वक्त वही समाज सबसे पहले कुर्बान कर दिया जाता है।
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