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झारखंड के एक रिमोट विलेज से CISF की वर्दी तक!
19 वर्षीय रोशनी वर्मा झारखंड के रांची ज़िले के एक दूरदराज़ गाँव से आती हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक मुश्किलों के बीच पढ़ाई जारी रखने और फुटबॉल खेलने के लिए उन्होंने कम उम्र में घरेलू काम भी किया। स्कूल की फीस और फुटबॉल किट जुटाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन खेल के प्रति जुनून ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया।
रोशनी ने 9 साल की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू किया। स्थानीय मैदानों पर अभ्यास करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई और आगे चलकर झारखंड राज्य का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया। यह सफ़र मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास का नतीजा रहा।
आज वही रोशनी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में स्पोर्ट्स कोटे के तहत चयनित होकर हेड कॉन्स्टेबल बनी हैं। वे CISF के अब तक के सबसे बड़े स्पोर्ट्स बैच की पासिंग-आउट परेड का हिस्सा रहीं, जो बल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
कम उम्र, बड़ा सपना और कड़ी मेहनत रोशनी वर्मा की कहानी बताती है कि प्रतिभा को अगर सही मौका मिले, तो हालात चाहे जैसे भी हों, किस्मत बदली जा सकती है।
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