1 د - ترجم

पूज्य बापू की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ। उनका जीवन सत्य, अहिंसा और राष्ट्रसेवा के उच्चतम आदर्शों का जीवंत प्रतीक रहा है। बापू से प्रेरणा लेते हुए हमें संकल्पित होकर यह प्रयास करना है कि राष्ट्रसेवा हमारे जीवन का मूल भाव बने और बापू के विचारों व मूल्यों के अनुरूप एक सशक्त, आत्मनिर्भर तथा नैतिक रूप से दृढ़ भारत के निर्माण हेतु हम पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ें।

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