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उसके पास कुछ भी नहीं था, न कोई ओहदा था, न पद, न सोना, चांदी, न नकदी रकम, न तिजोरी, न कोई सेना थी न ही वह किसी मुल्क का बादशाह और न ही वह प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति था लेकिन करोड़ों लोगों के दिलों में वो धडकता था, कोटि कोटि जन उसमें पिता, संरक्षक, मार्गदर्शक देखता था क्योंकि उसके पास एक दिल था जिसमे सारी दुनिया समाई हुई थी, उस दुनिया में किसी भी तरह का कोइ भेद नहीं था,न उंच न नीच, न छोटा न बड़ा उसके लिए रंग बेमानी था, गोरा हो या काला, स्त्री हो या पुरुष सब उसके दिल में धडकते थे और इसीलिए शायद वह सारे दिलों में धडकता था।

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