8 hrs - Translate

व्यवस्था का यह दोहरा चरित्र देखिए
क्या यही समानता है? यह सवाल हम सबका है।
जब देश के विकास और टैक्स देने की बात आती है, तो हम गर्व से 'हिन्दुस्तानी' होते हैं।
जब धर्म और राजनीति को समर्थन चाहिए होता है, तो हमें 'हिन्दू' कहकर याद किया जाता है।
लेकिन जब सरकारी योजनाओं, सुविधाओं और हक़ की बात आती है... तो अचानक हम 'सवर्ण' हो जाते हैं और कतार से बाहर कर दिए जाते हैं।
ऊपर से UGC जैसे काले कानून और लगा देते।

image