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भारत का बजट और एक कड़वी सच्चाई!
आंकड़े साफ बता रहे हैं— जहाँ हर वर्ग के उत्थान के लिए करोड़ों का बजट आवंटित किया गया है, वहीं सामान्य श्रेणी के लिए यह आंकड़ा शून्य नजर आता है।
सवाल यह है कि क्या सामान्य वर्ग की भूमिका सिर्फ टैक्स भरने तक सीमित रह गई है? क्या 'सबका साथ, सबका विकास' में सामान्य वर्ग शामिल नहीं है?
ऊपर से UGC जैसे काले कानून को और लागू कर दिया।

समाज को अब इस पर विचार करना होगा। आपकी इस पर क्या राय है? कमेंट में लिखें। 👇

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