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अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने की मजबूरी में इस माँ ने सिर्फ़ 150 रुपये में अपने बाल बेच दिए। सोचिए—एक माँ अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए अपनी पहचान तक कुर्बान कर देती है। यह कहानी गरीबी की नहीं, माँ की ममता, त्याग और हिम्मत की है। अगर इंसानियत आज भी ज़िंदा है, तो ऐसी माँओं को नज़रअंदाज़ मत कीजिए—उन्हें सम्मान दीजिए, समझिए और संवेदना दिखाइए। 🙏

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