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राजस्थान की धरती पर जन्मे पाबूजी महाराज वीरता, वचन और धर्म के ऐसे प्रतीक हैं जिन्हें आज भी लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है। उनका जन्म कोलू में राठौड़ वंश में हुआ। उनके पिता धांधल राठौड़ और माता कमलादे थीं। बचपन से ही पाबूजी साहसी, न्यायप्रिय और करुणामय थे।

वचन का बंधन

एक दिन देवल चारण नामक एक गौपालक ने पाबूजी महाराज से अपनी गायों की रक्षा का आग्रह किया। पाबूजी महाराज ने उसे वचन दिया—
“जब तक प्राण हैं, तुम्हारी गायों की रक्षा करूँगा।”
राजस्थान की परंपरा में यह वचन जीवन से भी बड़ा होता है।

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