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गाजियाबाद, राजनगर एक्सटेंशन के रईसपुर गांव में समाजसेवा की एक मिसाल सामने आई है। किसान चौधरी सुरिंदर ने अपने मित्रों के सहयोग से यहां एक अनोखा ‘कपड़ा बैंक’ शुरू किया है, जहां जरूरतमंद लोग—खासतौर पर बच्चे—महज 1 रुपये में पूरी यूनिफॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। 👕👖
इस पहल की खास बात यह है कि यहां मदद को भीख नहीं, सम्मान का रूप दिया गया है। चौधरी सुरिंदर बताते हैं कि सेवा के बदले 1 रुपये इसलिए तय किए गए हैं ताकि लेने वाला खुद को आत्मनिर्भर और सम्मानित महसूस करे। 🙏✨
कपड़ा बैंक की व्यवस्था के तहत कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति एक साल में अधिकतम चार बार ही कपड़े ले सकता है, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक सहायता पहुंच सके। यहां से कपड़े लेने वाले बच्चे पूरे आत्मसम्मान और गरिमा के साथ अपनी जरूरतें पूरी करते हैं—यही इस पहल की असली ताकत है। 👧👦💙
चौधरी सुरिंदर का कहना है कि इस प्रयास का उद्देश्य केवल कपड़ों की व्यवस्था करना नहीं, बल्कि सम्मान, बराबरी और आत्मविश्वास को मजबूत करना है। यह कपड़ा बैंक समाज में यह संदेश दे रहा है कि मदद ऐसे भी की जा सकती है, जहां लेने और देने—दोनों की गरिमा बनी रहे। 🌱🌟
➡️ समाज के लिए प्रेरक संदेश:
यह पहल बताती है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं—बस नीयत और नजरिया सही होना चाहिए। 💪😊

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