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IIT रुड़की के शोधकर्ताओं ने एक नई स्टडी में हिमालय क्षेत्र में 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) यानी 'हिमालयी सुनामी' की गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 से 2024 के बीच हिमालय की ग्लेशियल झीलों के क्षेत्रफल में 5.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वर्तमान में पहाड़ों पर 31,698 ऐसी झीलें मौजूद हैं, जो जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी के कारण अस्थिर हो रही हैं। अध्ययन में खुलासा हुआ है कि इस खतरे से करीब 93 लाख लोगों की जान जोखिम में है, जिनमें से 30 लाख आबादी अकेले भारत की है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ये झीलें 'टिकिंग टाइम बम' की तरह हैं, जिनसे भविष्य में केदारनाथ जैसी भारी तबाही आने की आशंका है। इस महत्वपूर्ण रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने NASA के उच्च-क्षमता वाले सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया है।

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