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मै ठाकुर हु, ये बोलना जातिवाद नहीं है. … समस्या भारत के उस मीडिया तंत्र की है जो विचारों की ठेकेदारी लेकर बैठा है और हर विचार को अपनी घटिया मीडियाछाप सोच का चोला पहनाकर समाज मे परोस देता है
देश मे जातिवाद है नहीं बल्कि उसे पैदा किया जाता है मीडिया व आधुनिक जातिवादियों यानि अम्बेडकरवादियों द्वारा!
मै ठाकुर हु ये जातिवाद हो गया लेकिन SC ST OBC का सर्टिफिकेट भाग भाग कर बनवाने वाले और जगह जगह उस सर्टिफिकेट को लगाने वाले जातिवादी नहीं है??? स्वयं को ठाकुर ब्राह्मण बनिया इत्यादी कहना जातिवाद नहीं हो सकता , ये समान्य सी बाते है, मगर इसको जातिवाद समझने वाले की सोच मे जातिवाद है, भगवान राम ने परशुराम से कहा था कि भगवन हम क्षत्रिय है, हम आपका सम्मान करते है किन्तु यदि कोई युद्ध मे हमें ललकारे तो हम पीछे नहीं हटते,... तो क्या भगवान राम जातिवादी थे?? कुरुक्षेत्र कि रणभूमि मे ज़ब सुशर्मा ने अर्जुन को ललकारा तो अर्जुन ने कहा था कि क्षत्रिय को अगर कोई चुनौती दे तो उसे सारे कार्य छोड़कर उस चुनौती को स्वीकार करना चाहिए.... तो क्या अर्जुन जातिवादी थे???
जिस मीडिया या नीले सियारों को इन सब घटनाओ मे जातिवाद नजर आता है वास्तव मे यही मीडिया और नीले सियार जातिवादी है.... क्युकी जातिवाद के समस्त कंसेप्ट इन्ही के गढ़े हुए है

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