4 heures - Traduire

रेल की दो बोगियों के बीच बैठा वो आदमी, गोद में सोता मासूम…
और बगल में सिमटी हुई वो औरत —
ये कोई स्टंट नहीं था,
ये मजबूरी थी… गरीबी की मजबूरी।
उस औरत की आँखों में शिकायत नहीं थी,
थकान थी… डर था…
लेकिन अपने मर्द के लिए भरोसा भी था।
क्योंकि सच यही है—
एक औरत अपने मर्द की गरीबी झेल सकती है,
फटे कपड़े, खाली जेब, भूखे दिन झेल सकती है…
लेकिन उस

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