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आंध्र प्रदेश के सुरुट्टापल्ली में स्थित श्री पल्लीकोंडेश्वर स्वामी मंदिर भगवान शिव के उस दुर्लभ रूप के लिए जाना जाता है, जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। यहां शिवलिंग नहीं, बल्कि भगवान शिव माता पार्वती की गोद में आनंद शयन मुद्रा में विराजमान हैं, ठीक वैसे जैसे भगवान विष्णु अनंत शयन में दिखाई देते हैं।

मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान विषपान के बाद भगवान शिव यहां विश्राम के लिए लेटे थे और माता पार्वती ने उनका सिर अपनी गोद में रखा। इसी कारण इस स्थान को सुरुट्टापल्ली कहा गया। यह मंदिर प्रदोष पूजा की उत्पत्ति स्थल भी माना जाता है, जहां दर्शन करने से बाधाएं दूर होने और जीवन में तरक्की मिलने की आस्था है।

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