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संसद में कड़े शब्दों में अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने देशभर में फैले खाद्य मिलावट संकट पर गंभीर चेतावनी दी और इसे हर भारतीय परिवार के लिए खतरा बताया, उन्होंने कहा कि मुनाफे की लालच में रोज़मर्रा के खाने में ज़हरीले पदार्थ मिलाए जा रहे हैं, चड्ढा के मुताबिक दूध में यूरिया, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन, पनीर में कास्टिक सोडा, मसालों में ईंट का चूरा, शहद में आर्टिफिशियल कलर, चिकन में स्टेरॉयड और यहां तक कि आइसक्रीम में डिटर्जेंट तक मिलाया जा रहा है, उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ उपभोक्ताओं को धोखा नहीं बल्कि उन्हें धीरे-धीरे मारने जैसा है, इसे एक गंभीर जनस्वास्थ्य आपातकाल बताते हुए उन्होंने कहा कि लोग अनजाने में रोज़ ज़हर खा रहे हैं, बच्चों पर इसका असर सबसे ज़्यादा पड़ रहा है और लंबे समय तक इसका सेवन गंभीर बीमारियों और कम होती उम्र का कारण बन सकता है, राघव चड्ढा ने कमजोर कानून व्यवस्था और मिलावटखोरों में डर की कमी पर सरकार को घेरा और मांग की कि खाद्य सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाए, उनके इस बयान के बाद नियामक विफलता, भ्रष्टाचार और सख्त कानूनों की ज़रूरत पर बहस और तेज हो गई है।

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