सपनों की कोई सीमा नहीं होती, और इसे सच कर दिखाया है लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी ने। हरियाणा के चरखी दादरी के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने का उनका सफर हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

7वीं क्लास में एक एयरफोर्स पायलट की वर्दी देखकर सेना में जाने की ठान ली थी। जिला स्तर की बैडमिंटन और वॉलीबॉल खिलाड़ी रहीं यशस्वी ने शारीरिक और मानसिक फिटनेस के हर पैमाने को पार किया। 15 दिनों के टफ ओरिएंटेशन और खुद राष्ट्रपति द्वारा इंटरव्यू के बाद उनका चयन हुआ।

राष्ट्रपति की पहली महिला एड-डी-कैंप (ADC) बनकर उन्होंने सदियों पुरानी परंपरा को बदल दिया। यशस्वी के पिता एक सरकारी स्कूल टीचर हैं और उनकी यह सफलता देश की उन करोड़ों बेटियों के लिए मिसाल है जो बाधाओं को तोड़कर आगे बढ़ना चाहती हैं।

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