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गोमाता अब सिर्फ श्रद्धा ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक आजीविका का आधार भी हैं। संभल की अनुपमा सिंह ने 'जानकी महिला स्वयं सहायता समूह' के जरिए गोबर और गौमूत्र से दीवार घड़ी और हर्बल गुलाल जैसे उत्पाद बनाकर सालाना ₹2.5 लाख की कमाई का सफल मॉडल खड़ा किया है।

मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) की डिग्री रखने वाली अनुपमा ने अपनी सोच को एक उद्यमी (Entrepreneur) के रूप में बदला और ग्रामीण महिलाओं को साथ जोड़ा।

अनुपमा का समूह गोबर से सिर्फ मूर्तियाँ ही नहीं, बल्कि दीवार घड़ी, मोबाइल स्टैंड और पूजा की चौकियाँ भी तैयार कर रहा है। केमिकल मुक्त रंगों की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने शुद्ध हर्बल गुलाल तैयार किया है, जो बाजार में ब्रांडेड वस्तुओं को टक्कर दे रहा है।

NRLM के सहयोग से आज अनुपमा हर महीने लगभग ₹20,000 की स्थिर आय प्राप्त कर रही हैं और दर्जनों महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।

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