ना सत्ता का अभिमान, ना पराजय का भय,
रणभूमि में जिनका तेज ही था विजय।
जिन्होंने इतिहास को अपनी नीति से मोड़ा,
वो था सूरजमल जाट हमारा।
महाराजा सूरजमल जाट जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
सूरजमल जाट जी अद्वितीय रणनीतिकार, दूरदर्शी शासक और धर्म के सच्चे संरक्षक थे। जब अनेक शक्तियाँ झुक चुकी थीं, तब उन्होंने स्वाभिमान को अपना अस्त्र बनाया और न्याय को अपना शस्त्र। उन्होंने यह सिद्ध किया कि वीरता केवल युद्ध जीतने में नहीं, बल्कि प्रजा का विश्वास जीतने में होती है। उनका शासन पराक्रम, नीति और लोककल्याण का आदर्श उदाहरण था।