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कार में सीट नहीं मिली, लेकिन दिल में बहन के लिए जगह सबसे बड़ी थी! 💔🚲
बिहार की एक सड़क… आगे सजाई हुई कार में बैठी नई-नवेली दुल्हन… और पीछे-पीछे एक पतली सी सड़क पर पैडल मारता उसका छोटा भाई। विदाई का वो पल, जब आंखें नम होती हैं… लेकिन इस बार दर्द थोड़ा और गहरा था। कार में जगह कम पड़ी, तो छोटे भाई ने शिकायत नहीं की… बस चुपचाप साइकिल उठाई और अपनी बहन के पीछे-पीछे 70 किलोमीटर तक चलता रहा।
न कोई शोर… न कोई गुस्सा… सिर्फ एक मासूम सा रिश्ता, जो दूरी से भी कम नहीं हुआ। हर मोड़ पर, हर धूल भरी सड़क पर, वह अपनी बहन को जाते हुए देखता रहा… जैसे कह रहा हो — “दीदी, तुम जहां भी रहो, मैं यहीं हूं।”
ये सिर्फ एक तस्वीर नहीं, भाई-बहन के उस अटूट बंधन की कहानी है, जिसमें सुविधाएं छोटी पड़ जाती हैं और भावनाएं बड़ी हो जाती हैं। आज के दौर में जहां लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते छोड़ देते हैं, वहां यह बच्चा हमें सिखा गया कि सच्चा प्यार साथ चलने का नाम है… चाहे सीट मिले या नहीं।
आंसू सिर्फ विदाई के नहीं थे… गर्व के भी थे। क्योंकि कुछ रिश्ते कार की सीट से नहीं, दिल की धड़कन से जुड़े होते हैं।
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