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भारतीय लोकतंत्र की आत्मा जनसेवा है। जब शासन व्यवस्था स्वयं को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम मानती है, तब वह राष्ट्रनिर्माण की दिशा में एक उच्च आदर्श स्थापित करती है। आज का दिन इसी भावना का साक्षी है, जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने अपने कार्यालय को “सेवा तीर्थ’ के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया। यह केवल एक भवन का लोकापर्ण ही नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में सेवा, समर्पण और पारदर्शिता के संकल्प का उद्घोष है।

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