स्वाति मालीवाल को खुद बदलने की ज़रूरत नहीं थी बस गलत संगत से अलग होने की ज़रूरत थी। कहते हैं न, गलत संगत इंसान को धीरे-धीरे बर्बाद कर देती है, और उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।

आज उन्हें देखिए। वह लगातार सही मुद्दे उठा रही हैं और आम लोगों की असली परेशानियों पर खुलकर बोल रही हैं। खासतौर पर उन्होंने जिस तरह अस्पतालों की लूट पर सवाल खड़े किए हैं, वह कड़वी सच्चाई को सामने लाता है।

उन्होंने साफ कहा कि जैसे ही किसी अस्पताल को पता चलता है कि मरीज के पास हेल्थ इंश्योरेंस है, इलाज से पहले कमाई शुरू हो जाती है। बिना ज़रूरत की जांचें लिख दी जाती हैं, बिल फुला दिए जाते हैं और सिर्फ टेस्ट के नाम पर 20-25 हज़ार रुपये वसूल लिए जाते हैं, जबकि असली इलाज अभी शुरू भी नहीं होता।

यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों का रोज़ का अनुभव है। आज स्वाति मालीवाल ज़मीन से जुड़े मुद्दों पर बात कर रही हैं, जिन पर अक्सर पर्दा डाल दिया जाता है। उनकी यह साफ सोच दिखाती है कि जब इंसान गलत प्रभाव से बाहर निकलकर लोगों के लिए आवाज़ उठाता है, तो उसकी बात में दम और असर दोनों होते हैं।

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