इंदौर की घटना ने आत्मा को झकझोर दिया…कभी इस हिंदुस्तान को संस्कृति की शान कहा जाता था पर आज हालात कितने बदल गए
ये सिर्फ एक अपराध नहीं, यह हमारी संवेदनाओं की परीक्षा है।
एक बेटी, जो सपनों के साथ घर से निकली थी…
एक परिवार, जिसने भरोसे के साथ उसे शहर भेजा था…
और एक युवा, जिसने इंसानियत की सारी सीमाएँ लांघ दीं।
नशा केवल शरीर को नहीं, सोच को भी मार देता है।
जब चरित्र कमजोर होता है, तब अपराध जन्म लेता है।
और जब हम चुप रहते हैं, तब अपराधियों का हौसला बढ़ता है।
युवाओं से निवेदन है—
आकर्षण को प्रेम मत समझो।
गुस्से को अधिकार मत समझो।
नशे को आधुनिकता मत समझो।
किसी की “ना” को चुनौती मत समझो।
सच्ची मर्दानगी सुरक्षा में है, सम्मान में है, संयम में है।
और सच्ची आधुनिकता संस्कारों के साथ आगे बढ़ने में है।
माता-पिता अपना सर्वस्व त्यागकर बच्चों को पढ़ने भेजते हैं—
ताकि वे देश का भविष्य बनें, किसी की जिंदगी का अंत नहीं।
आज जरूरत है—
परिवारों में संवाद की
शिक्षा में नैतिकता की
मित्रता में मर्यादा की
समाज में सजगता की
आइए संकल्प लें—
हम अपने शहर, अपने देश को ऐसा नहीं बनने देंगे।
हम अपनी सोच को शुद्ध रखेंगे, दूसरों की गरिमा का सम्मान करेंगे,
और हर बेटी की सुरक्षा को अपना कर्तव्य मानेंगे।
इंदौर की यह घटना केवल खबर नहीं…
यह चेतावनी है।
अब भी समय है—
युवा जागें, समाज जागे, देश जागे। 🇮🇳
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