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भीड़ थी… धक्का था… लंबा रास्ता था…
लेकिन एक बेटे के कंधों पर सिर्फ उसकी माँ थी ❤️
संगम तक पहुंचना आसान नहीं था,
पर माँ की इच्छा सबसे ऊपर थी।
थकी हुई उम्र… कमजोर कदम…
लेकिन बेटे का सहारा बना उसका हौसला।
कंधों पर बैठी माँ मुस्कुरा रही थी,
क्योंकि उसे पता था —
जिस बेटे को कभी उसने उंगली पकड़कर चलना सिखाया,
आज वही उसे सहारा देकर जीवन का सबसे पवित्र स्नान करा रहा है।
🙏 यही है असली संस्कार
🙏 यही है असली सेवा
🙏 यही है माँ-बेटे के प्रेम की मिसाल
“माँ के लिए बेटा कभी बड़ा नहीं होता…
और बेटे के लिए माँ कभी बोझ नहीं होती।”

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