4 часы - перевести

जापान ने प्लास्टिक प्रदूषण की बढ़ती समस्या का समाधान खोजने की दिशा में एक अभिनव पहल की है। वहां आलू के स्टार्च से बने ऐसे ग्रोसरी बैग विकसित किए गए हैं, जो पानी में सुरक्षित रूप से घुल जाते हैं। ये बैग रोजमर्रा की खरीदारी के लिए पर्याप्त मजबूत हैं, लेकिन उपयोग के बाद पर्यावरण में लंबे समय तक नहीं टिकते। पारंपरिक प्लास्टिक की तरह ये सैकड़ों वर्षों तक जमीन या समुद्र में जमा नहीं रहते और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान नहीं पहुंचाते।
खास बात यह है कि ये बैग ठंडे पानी में भी पूरी तरह घुल जाते हैं। यदि गलती से मछली या कछुआ इन्हें निगल भी ले, तो यह बिना किसी हानि के प्राकृतिक रूप से टूट जाते हैं। हर साल समुद्र में पहुंचने वाले लाखों टन प्लास्टिक कचरे के बीच, ऐसी तकनीक प्रदूषण कम करने और समुद्री जीवों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जापान का यह कदम दिखाता है कि छोटे लेकिन व्यावहारिक नवाचार टिकाऊ भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।

image