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जैसे ही तस्वीर वायरल हुई, उसका संदर्भ बदल गया। और "लाइक" के भूखे कुछ सोशल मीडिया पेजों और तथाकथित न्यूज़ पोर्टल्स ने उस तस्वीर को उठा लिया।
सच्चाई बहुत साधारण थी, इसलिए उन्होंने उसे मसालेदार बना दिया।
किसी ने कैप्शन लिखा: "कलियुग का सच: इतनी कम उम्र में बनी मां।"
किसी ने लिखा: "समाज कहां जा रहा है? इस वायरल फोटो का सच जानकर हैरान रह जाएंगे आप।"
देखते ही देखते, 14 साल की रिया, जो अपने छोटे भाई को गोद में खिला रही थी, इंटरनेट के लिए एक "नाबालिग मां" बन गई। लोग बिना सच जाने भद्दे कमेंट्स करने लगे, रिया के चरित्र पर उंगलियां उठने लगीं।
जब यह बात सुमन तक पहुंची, तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उन्होंने देखा कि उनकी मासूम बेटी की तस्वीर के साथ कैसी घिनौनी हेडलाइन्स चल रही हैं। वह रिया, जो अपने भाई के लिए अपनी नींद कुर्बान कर रही थी, उसे दुनिया के सामने गलत तरीके से पेश किया जा रहा था।
सुमन का गुस्सा और बेबसी (जैसा कि तस्वीर में उनके चेहरे पर दिख रहा है) फूट पड़ा। वह चिल्लाईं, "यह मेरा बेटा है! और वह उसकी बहन है! यह दुनिया इतनी अंधी कैसे हो सकती है? कुछ लाइक्स के लिए एक बच्ची की जिंदगी से खेल गए?"
उन्होंने सच्चाई बताने की कोशिश की, कमेंट्स में लिखा, लेकिन झूठ की रफ़्तार सच से कहीं तेज़ थी। डिजिटल दुनिया की इस गंदगी ने एक पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया था।
उस दिन सुमन ने महसूस किया कि आज की पत्रकारिता और सोशल मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सच दिखाने के लिए नहीं, बल्कि सनसनी फैलाने के लिए है। गोद में भाई था, पर दुनिया को 'मां' बताकर गुमराह किया गया। यह सिर्फ एक गलत खबर नहीं थी, यह एक परिवार की इज्जत पर डिजिटल हमला था

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