11 hrs - Translate

जनता का पैसा और नेताओं के ठाठ: ₹9000 का मोबाइल बिल? 🤔
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस देश में एक आम आदमी मात्र ₹350 में महीने भर का अनलिमिटेड डेटा और कॉलिंग का लुत्फ उठा लेता है, वहां हमारे माननीय विधायकों को फोन खर्च के नाम पर ₹9000 प्रति महीना क्यों दिया जा रहा है?

यह सवाल सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था और मंशा का है। आज के डिजिटल युग में, जहाँ 5G और अनलिमिटेड प्लान्स ने दूरियों और खर्चों को समेट दिया है, वहां सरकारी खजाने से इतनी भारी-भरकम राशि का आवंटन समझ से परे है।

क्यों ज़रूरी है यह सवाल?

टैक्सपेयर्स का पैसा: यह पैसा किसी नेता की जेब का नहीं, बल्कि आपकी और हमारी मेहनत की कमाई (Tax) का है।

बचत की गुंजाइश: अगर एक विधायक ₹8650 महीना बचा सकता है, तो पूरे देश में यह आंकड़ा करोड़ों में पहुँच जाएगा। क्या यह पैसा शिक्षा या स्वास्थ्य में नहीं लग सकता?

समानता का अधिकार: जब जनता को सस्ते रिचार्ज का सुझाव दिया जाता है, तो नेताओं के लिए अलग मानक क्यों?

यह तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। भारत पूछ रहा है कि क्या अब समय नहीं आ गया है कि इन फिजूलखर्ची वाले भत्तों (Allowances) पर लगाम कसी जाए? अगर आप भी मानते हैं कि सरकारी सुविधाओं के नाम पर होने वाली इस बर्बादी को रुकना चाहिए, तो इस पोस्ट को शेयर करें और अपनी राय कमेंट बॉक्स में ज़रूर दें!

जगो इंडिया, सवाल पूछना शुरू करो! 🇮🇳✍️

#indiainaction #taxpayermoney #indianpolitics #viralpost #bharatpoochtahai #awakeindia

image