जैसे ही NCERT का मामला कोर्ट पहुंचा, सरकार ने सिर्फ माफी ही नहीं मांगी, बल्कि तुरंत सफाई भी देनी पड़ी।
खुद प्रधानमंत्री को सामने आकर कहना पड़ा कि
“जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी।”
शिक्षा मंत्री ने भी तुरंत खेद प्रकट कर दिया।
एक कड़ी फटकार क्या पड़ी, सिस्टम तुरंत हरकत में आ गया।
लेकिन दूसरी तरफ देखिए।
40 करोड़ सामान्य वर्ग के लोग पिछले दो महीने से UGC मामले पर सरकार के बयान का इंतज़ार कर रहे हैं।
लेकिन ना कोई स्पष्ट जवाब, ना ठोस आश्वासन, ना जवाबदेही।
मिला क्या?
चुप्पी।
टालमटोल।
और झूठी उम्मीदों का सहारा।
जब बात अपनी छवि बचाने की आती है, तो फैसले तेज़ हो जाते हैं।
जब बात अपने ही समर्थकों की चिंता की होती है, तो संवेदनशीलता गायब हो जाती है।
यही सच्चाई है।
सोचिए ज़रूर।