ये हैं हलधर नाग
इनके पास तीन जोड़ी कपड़े, एक टूटी चप्पल, एक बिना फ्रेम का चश्मा और बैंक में 732 रुपये हैं।
- दस साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया।
- पिता की मृत्यु के बाद परिवार का सहारा देने के लिए उन्होंने तीसरी कक्षा में ही स्कूल छोड़ दिया।
- उन्होंने एक ढाबे पर बर्तन धोए।
- 1990 में नाग ने अपनी पहली कविता लिखी, जो कोसली भाषा की एक स्थानीय पत्रिका में प्रकाशित हुई।
उन्होंने कई कविताएँ और 20 महाकाव्य लिखे।
2016 में सरकार ने उन्हें पद्म श्री पुरस्कार के लिए आमंत्रित किया, लेकिन उन्होंने कहा, "साहब, मेरे पास दिल्ली आने के लिए पैसे नहीं हैं। कृपया पुरस्कार डाक से भेज दें...
