4 часы - перевести

सिर्फ 500 रुपये की वजह से 15 दिन से स्कूल न आने वाली उस छात्रा को ढूंढते हुए जब प्रिंसिपल खुद खेतों तक
पहुँच गए, तो ये नज़ारा हर दिल को छू गया। रोती हुई लड़की ने कहा, "साहब, मेरे पास फीस के पैसे नहीं थे..." यह सुनते ही प्रिंसिपल ने कहा, "फीस मत दो, लेकिन पढ़ाई कभी मत छोड़ना।" उन शब्दों ने न सिर्फ उस बच्ची की आँखों के आँसू पोंछे, बल्कि उसके सपनों को भी नया रास्ता दे दिया। उस दिन एक प्रिंसिपल नहीं, एक फरिश्ता सामने खड़ा था। ऐसे लोग समाज की असली ताकत होते हैं। अगर आपको भी यह सोच सही लगी हो तो दिल से एक Like जरूर करें

image