डांट नहीं, आईना दिखाया… और बदल गई बच्चे की आदत! 👀📱
हर घर की एक आम कहानी है—बच्चे देर रात तक मोबाइल पर, और माता-पिता की चिंता बढ़ती हुई। लेकिन इस पिता ने गुस्से का रास्ता नहीं चुना। उन्होंने न तो फोन छीना, न सज़ा दी।
उन्होंने बस एक छोटा सा कदम उठाया। रात को सोते समय बच्चे की आंखों के नीचे हल्के काले निशान बना दिए। सुबह जब बच्चा आईने के सामने गया, तो वह खुद चौंक गया।
तब पिता ने शांति से समझाया—
“ज्यादा स्क्रीन टाइम तुम्हारी आंखों और शरीर पर ऐसा ही असर डाल सकता है।”
न कोई चिल्लाहट।
न कोई अपमान।
सिर्फ सच का आईना।
यही असली परवरिश है—जहां डर नहीं, समझ होती है।
जहां सज़ा नहीं, संवाद होता है।
जहां आदेश नहीं, उदाहरण होता है।
बच्चों की आदतें बदलनी हों तो सबसे ताकतवर हथियार है प्यार, धैर्य और सही समय पर दी गई सीख।
क्योंकि बदलाव दबाव से नहीं, एहसास से आता है। 💛

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