एक समय था…
जब मैं अपनी माँ को “माँ” कहकर पुकारती थी।
उनकी गोद में सिर रखकर सो जाती थी,
और बिना किसी चिंता के सपने देखती थी।

आज वही मैं हूँ…
लेकिन अब मेरी गोद में मेरी दुनिया सोती है।
अब कोई नन्ही सी आवाज मुझे “माँ” कहती है।…

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