4 часы - перевести

सिंगल मदर ही है ‘Complete Parent’!

बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब पिता का नाम जरूरी नहीं

देश की न्याय व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में साफ कहा है कि सिंगल मदर भी ‘कंप्लीट पैरेंट’ मानी जाएगी और बच्चे के दस्तावेजों में पिता का नाम अनिवार्य नहीं होगा।

⚖️ क्या है पूरा मामला?

मामला स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट और अन्य सरकारी दस्तावेजों में पिता का नाम दर्ज करने की अनिवार्यता से जुड़ा था। याचिका में कहा गया कि कई परिस्थितियों में मां अकेले ही बच्चे की परवरिश करती है, ऐसे में पिता का नाम अनिवार्य करना अनुचित है।

🏛️ कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि:
• यदि मां अकेले बच्चे की अभिभावक है,
• तो दस्तावेजों में केवल मां का नाम दर्ज किया जा सकता है।
• किसी भी संस्था को पिता का नाम अनिवार्य रूप से मांगने का अधिकार नहीं।

👩‍👧 महिलाओं को मिला बड़ा संवैधानिक अधिकार

इस फैसले को महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे उन हजारों सिंगल मदर्स को राहत मिलेगी जो सामाजिक और कानूनी अड़चनों का सामना कर रही थीं।



🔴 क्यों है ये फैसला ऐतिहासिक?

✔ महिलाओं की स्वतंत्र पहचान को मान्यता
✔ बच्चों के अधिकारों की रक्षा
✔ सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव

image