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विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों से मेरा विनम्र आग्रह है कि प्रकृति ने हमें इस सुंदर धरा की रक्षा का दायित्व सौंपा है। विशेषकर वन्यजीव हमारी जैव विविधता की अमूल्य धरोहर हैं। उनका संरक्षण केवल पर्यावरण संतुलन के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है।
आज समय की मांग है कि मानव और वन्यजीव के बीच जो सामंजस्य और सहअस्तित्व की परंपरा हमें अपने पूर्वजों से मिली है, उसी भावना को आगे बढ़ाते हुए हम वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करें, अवैध शिकार और वन कटान को रोकने में अपना योगदान दें तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करें।
देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसके घने वन, हिमालयी वन्यजीव और प्राकृतिक संपदा से है। आइए, हम सभी मिलकर संकल्प लें कि वन्यजीव संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखेंगे।

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