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पंडित गोविंद बल्‍लभ पंत आजादी के एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के अपना काम पूरा किया। गोविंद बल्‍लभ पंत ने ना सिर्फ आजादी की लड़ाई लड़ी बल्कि हिंदी को भी सम्मान दिलाने का काम किया। भारत रत्न से सम्मानित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे और भारत के चौथे गृह मंत्री थे। गोविंद बल्‍लभ पंत को 1957 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। गृहमंत्री के तौर पर गोविंद बल्‍लभ पंत ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का काम किया था। उन्होंने भारत के राज्यों को भाषा में विभक्त करने का भी काम किया था।
एक वकील के तौर पर काकोरी मुकद्दमें में गोविंद बल्‍लभ पंत को पहचान दिलाई। पंत जी महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते थे।
दिसंबर 1921 में गोविंद बल्‍लभ पंत ने महात्मा गांधी जी के आह्वान पर असहयोग आंदोलन के जरिए खुली राजनीति में उतर आए थे।
1 अगस्त को जब 1924 में काकोरी कांड में जब प्रदेश के कुछ नवयुवकों ने सरकारी खजाना लूट लिया था तो उनके मुकदमें की पैरवी के गोविंद बल्‍लभ पंत ने पूरी कोशिश की थी।
1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार और 1930 में नमक सत्याग्रह में भी गोविंद बल्‍लभ पंत ने हिस्सा लिया था। मई 1930 में गोविंद बल्‍लभ पंत देहरादून जेल में भी गए थे। 1937 में गोविंद बल्‍लभ पंत संयुक्त प्रांत के प्रथम प्रधानमंत्री भी बने थे।
1946 में उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री भी गोविंद बल्‍लभ पंत थे।
10 जनवरी 1955 को गोविंद बल्‍लभ पंत भारत के चौथे गृह मंत्री बने। 7 मार्च 1961 को गोविंद बल्लभ पंत का निधन हो गया।
आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि और नमन्।
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