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भाजपा रामलीला मैदान के आयोजन से नहीं भयभीत है।

उसे किसी यूट्यूबर, नेता अथवा ट्विटर हैंडल से फर्क नहीं पड़ता और ना ही उनसे वह डरती है....

उसे भय इस बात का है कि एक बार आंदोलन के चलते यूजीसी का मुद्दा छा गया, घर-घर तक ये बात पहुँच गई कि नरेंद्र मोदी ने गत 6-7 वर्षों में कैसा तुष्टिकरण किया है,

तो उनका बनाया हुआ हिन्दू हृदय सम्राट का तिलस्म तो खत्म होगा ही, साथ में अमित शाह का किला भी भरभरा कर गिर सकता है।

वो इस खबर को, विषय को यहीं रोकना चाहते हैं क्योंकि संघ से लेकर भाजपा के अंदरूनी सर्कल में अब समझ सबको आ गया है कि ये विषय उतना छोटा नहीं था।