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हरि अनंत, हरि कथा अनंता श्रृंखला में आगे बढ़ते हुए,गुरु विश्वामित्र की आज्ञा मिल चुकी है।
मिथिला की विशाल सभा में अब सबकी दृष्टि एक ही युवक पर टिक गई है — अयोध्या के राजकुमार राम।
लक्ष्मण शांत होकर बैठ चुके हैं।
राजा जनक का हृदय धड़क रहा है।
और जानकी…
उनकी स्थिति तो तुलसीदास जी स्वयं कहते हैं —
राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि।
चितई सीय कृपायतन जानी बिकल बिसेषि॥

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