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देश में एक बार फिर नाबालिग अपराधियों को मिलने वाली सजा को लेकर बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के नेता Raghav Chadha का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बलात्कार जैसे गंभीर अपराध किए जाते हैं तो अपराधी पीड़िता की उम्र नहीं देखता, लेकिन सजा देते समय सिस्टम अपराधी की उम्र क्यों देखता है।

यह बयान ऐसे समय में चर्चा में आया है जब देश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता रहता है। सोशल मीडिया पर कई लोग कड़े कानून और नाबालिग अपराधियों के लिए भी सख्त सजा की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कानून का उद्देश्य नाबालिगों को सुधारने का मौका देना भी होता है।

भारत में ऐसे मामलों से निपटने के लिए Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 लागू है, जिसके तहत 18 साल से कम उम्र के आरोपियों को अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जाता है। हालांकि गंभीर अपराधों में 16–18 साल के किशोरों को परिस्थितियों के आधार पर वयस्क की तरह ट्रायल करने का प्रावधान भी मौजूद है।

यह मुद्दा एक बार फिर देश में न्याय, सुरक्षा और कानून के संतुलन पर बड़ी बहस को जन्म दे रहा है।

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