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ब्रह्मांड को ‘अंड’ (Cosmic Egg या हिरण्यगर्भ) इसलिए कहा गया है क्योंकि प्राचीन मान्यता के अनुसार, सृष्टि की शुरुआत से पहले सारा पदार्थ और ऊर्जा एक अंडाकार, सघन बिंदु में समाहित थी, जिससे बाद में पूरा ब्रह्मांड प्रस्फुटित हुआ। यह अवधारणा पौराणिक कथाओं में अंडाणु (Seed) के रूप में जीवन की उत्पत्ति, और आधुनिक विज्ञान में बिग बैंग से पहले के सघन अवस्था का प्रतीक है।
मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:
• सृष्टि की उत्पत्ति: हिंदू धर्म में पुराणों के अनुसार, यह अंडाकार ब्रह्मांड का ही एक रूप है, जिसमें से समय, स्थान और पदार्थ का जन्म हुआ।
• बिग बैंग का पौराणिक रूप: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक अत्यधिक सघन और गर्म बिंदु (सिंगुलैरिटी) से हुई है, जिसे ‘कॉस्मिक एग’ या ‘ब्रह्मांडीय अंडा’ के रूप में समझा जा सकता है।

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