इतना तेल समुद्र में बह रहा है, आग लगी हुई है और पूरे पश्चिमी एशिया में बारूद की गंध फैली हुई है, लेकिन क्या मजाल कि किसी तथाकथित पर्यावरण प्रेमी को समुद्री जैव विविधता, ग्लेशियरों के पिघलने या अन्य पर्यावरणीय खतरों की कोई चिंता दिखाई दे दे।
भारत में जैसे ही बच्चे दीपावली पर सूतली बम छोड़ते हैं, ऐसा माहौल बनाया जाता है मानो सारे ग्लेशियर उसी से पिघल जाते हैं।