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दिन-भर गाजा, फिलिस्तीन और ईरान की बात करने वाले नेता जब कैमरों के सामने आते हैं तो ऐसा दिखाते हैं जैसे दुनिया में सबसे ज्यादा दुख इन्हीं को है। बयान देते हैं, बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और खुद को इंसानियत का सबसे बड़ा हमदर्द बताते हैं।
लेकिन दूसरी तरफ तस्वीर कुछ और ही कहानी बताती है। जहां गाजा में लोग भूख और संकट से जूझ रहे हैं, वहीं यहां आराम से बैठकर कई तरह के पकवानों का आनंद लिया जा रहा है। हंसी-मजाक के बीच भरपूर दावत चल रही है, जैसे सब कुछ बिल्कुल सामान्य हो।
यही विरोधाभास लोगों को सोचने पर मजबूर करता है। एक तरफ दुख और संवेदना की बातें, दूसरी तरफ आराम और राजनीतिक दिखावा। इससे साफ समझ आता है कि कई बार ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल केवल राजनीति और छवि बनाने के लिए भी किया जाता है।
अब जनता को खुद तय करना होगा कि असली चिंता किसे है और कौन सिर्फ कैमरों के सामने संवेदना दिखाकर अपनी राजनीति चमका रहा है।
डिस्क्लेमर: यह पोस्ट सार्वजनिक तस्वीरों और चर्चाओं के आधार पर लिखी गई एक राय है।

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