मानवता की मिसाल या दोहरा मापदंड?
कुछ समय पहले एक युवक दीपक कुमार ने किसी की जान बचाने के लिए अपना नाम बदलकर “मोहम्मद” तक बता दिया था। उस समय सोशल मीडिया पर उसे इंसानियत की मिसाल बताया गया।
लेकिन अब एक और घटना सामने आई है, जहां एक मां अपने बेटे की जान बचाने के लिए गुहार लगाती रही, पर वहां कोई “दीपक कुमार” आगे नहीं आया।
❗ सवाल उठ रहा है —
क्या इंसानियत सिर्फ कुछ मौकों पर ही दिखाई देती है?
लोग सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं।
कुछ लोग इसे मानवता की जीत बता रहे हैं, तो कुछ इसे समाज का दोहरा चेहरा कह रहे हैं।
👉 आप क्या सोचते हैं?
क्या इंसानियत धर्म और नाम से ऊपर होनी चाहिए?
#breakingnews #humanity #viralnews #socialmedia
Anjali Kumari
ये वही लोग है जो पहलगाम और दिल्ली ब्लास्ट के हमलों पे चुप थे क्युकी इनकी कॉम के लोग थे और ख़ामेनई की मौत पे शोक मना रहे थे
Kommentar löschen
Diesen Kommentar wirklich löschen ?